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झूठ के दम पे मुहब्बत

सच के कारण मिली नफ़रत क़ुबूल है लेकिन झूठ के दम पे मुहब्बत नहीं अच्छी लगती यूँ तो रिश्ते मेरे दिल को सुक़ून देते हैं पर ये रिश्तों की सियासत नहीं अच्छी लगती भूख जिस वक़्त कलेजा गलाने लगती है तब ख़ुदाओं की इबादत नहीं अच्छी लगती उनको कल तक मेरा क़िरदार बहुत भाता था अब मेरी...

घुटने

जिनकी पहचान थी ख़ुद्दारी, उन्हीं लोगों के हाथ तो हाथ मेरे यार, जुड़े हैं घुटने बात जब अपने पे आती है बदलते हैं उसूल पेट की ओर ही हर बार मुड़े हैं घुटने ✍️ चिराग़...
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