सियासत किस तरह करती रही बर्ताव, मत भूलो
कुरेदेंगे तुम्हारे ही बदन के घाव, मत भूलो
तुम्हारी चीख़ से कुर्सी न हिल जाये मसीहा की
अरे ओ हाथरस वालो, अभी उन्नाव मत भूलो
✍️ चिराग़ जैन
सियासत किस तरह करती रही बर्ताव, मत भूलो
कुरेदेंगे तुम्हारे ही बदन के घाव, मत भूलो
तुम्हारी चीख़ से कुर्सी न हिल जाये मसीहा की
अरे ओ हाथरस वालो, अभी उन्नाव मत भूलो
✍️ चिराग़ जैन
संपर्क करें