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कौन सोचे किन चनों के साथ कितना घुन पिसा
जी रही है दामिनी या मर रही महरुन्निसा
आज तो अख़बार की दरकार है केवल यही
सात काॅलम सनसनी और एक काॅलम हादसा

✍️ चिराग़ जैन

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