तुमसे मिलते ही
बह निकलती हो कविता
-ऐसा नहीं है।
न तो मोम है कविता
न ही आग हो तुम।
तुम तो
अंजुरी हो
छपाक से भर जाती हो
कविता में डूबकर!
✍️ चिराग़ जैन
तुमसे मिलते ही
बह निकलती हो कविता
-ऐसा नहीं है।
न तो मोम है कविता
न ही आग हो तुम।
तुम तो
अंजुरी हो
छपाक से भर जाती हो
कविता में डूबकर!
✍️ चिराग़ जैन
संपर्क करें