बहुत समझदार हो तुम
जब कभी
उदासी का आँचल ओढ़कर
जवान होने लगता है
मेरा कोई दर्द
तो चुपचाप
बिना किसी शोर-शराबे के
‘कंधा देकर’
पहुँचा आते हो उसे वहाँ
…जहाँ से
लौट नहीं पाया कोई
आज तक।
✍️ चिराग़ जैन
बहुत समझदार हो तुम
जब कभी
उदासी का आँचल ओढ़कर
जवान होने लगता है
मेरा कोई दर्द
तो चुपचाप
बिना किसी शोर-शराबे के
‘कंधा देकर’
पहुँचा आते हो उसे वहाँ
…जहाँ से
लौट नहीं पाया कोई
आज तक।
✍️ चिराग़ जैन
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