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उम्मीद

कभी तो उम्मीद जी उठेगी कहीं तो मंज़र हसीं रहेगा कोई तो ऐसा भी वक़्त होगा कि जिसको हम पे यकीं रहेगा कुछेक लम्हों की बात सुनकर दुआ का दामन न छोड़ देना किसी चुभन की कसक से चिढ़कर हसीन गुंचे न तोड़ देना सुबह के माथे का ये पसीना सबा को छूकर महक उठेगा किसी तबस्सुम की बाँह थामे...
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