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हरसिंगार

तुमसे सिंचित कली हौले-हौले खिली चहकी …महकी इतराने लगी। हवाओं में बिखरने लगी उसकी ख़ुश्बू। …अरे! तुम रूठ क्यों गए हरसिंगार? काॅम्प्लेक्स में आ गए हो क्या? बर्दाश्त न हुई अपने जने की ख़ुश्बू? भार लगने लगा अपना ही अंश? तुम्हारी तो कीर्ति ही बढ़ाता था! वरना कौन...

आग्रह

आग्रह एक जंक्शन है यहाँ से संबंध बदल सकता है गाड़ी… घृणा के लिए भी घनिष्ठता के लिए भी विस्तार के लिए घुटन के लिए भी… हर जगह की गाड़ी है हुज़ूर आपको कहाँ का टिकट चाहिए? ✍️ चिराग़...

सरकार चल रही है

जो ख़ास हैं उन्हीं की अब दाल गल रही है और आम आदमी की टोपी उछल रही है सब चोर हैं सदन में- अख़बार बोलता है फिर भी ग़ज़ब है उनकी, सरकार चल रही है ✍️ चिराग़...

आपसे बात जब नहीं होती

अपनी बातों में कुछ नया भी नहीं और कुछ ख़ास मुद्दआ भी नहीं आपसे बात जब नहीं होती ऐसा लगता है दिन गया भी नहीं ✍️ चिराग़...

मेला बरसात में

उठ जा रे देख सुबह से बरस रहा है रामजी। ….बेमौसम ….झमाझम। मुझे चिंता हुई रामलीलाओं का क्या होगा? और अधबने रावण के पुतले… …वो तो भीग गए होंगे। देखने गया तो पाया सब कुछ भीग गया था रामलीला का मंच रावण का दरबार ऋष्यमूक पर्वत दंडक वन पर्णकुटी पुष्पक...
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