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अर्थ बदल के देख

सूरज जैसा जल के देख सोच में मेरी ढल के देख मुझसे तेज़ निकल के देख अपनी सोच बदल के देख हाला तेरे अंतस् की यहाँ-वहाँ न छलके देख अगुआई क्या होती है मेरे आगे चल के देख फिर से तेरी बात चली फिर से आँसू ढलके देख राम लिखा और तैर गए पत्थर होकर हल्के देख पायल मौन चली आई होंठ...

अंधानुकरण

कजरी, गारी, फाग, जोगीरे भूल गए बंसी, तबले, ढोल, मंझीरे भूल गए इतनी तेज़ी से दुनिया की ओर बढ़े अपने घर को धीरे-धीरे भूल गए ✍️ चिराग़...

आज़माइश

यहाँ चलता नहीं दस्तूर कोई भी ज़माने का ग़ज़ब है लुत्फ़ इन राहों पे सब कुछ हार जाने का नज़र मिलते ही दिल काबू से बाहर जान पड़ता है मुहब्बत में कहाँ मिलता है मौक़ा आज़माने का ✍️ चिराग़...

सुरों की आह

ज़माने ने सुरों की आह को झनकार माना है कहीं संवेदना जीती तो उसको हार माना है बड़े बईमान मानी तय किए हैं भावनाओं के जहाँ दो दिल तड़पते हों उसी को प्यार माना है ✍️ चिराग़...

छलना

मटक-मटक लट झटक-झटक; हिया- पट खटपट खटकाती है गुजरिया ठक-ठक-ठक खटकात नटखट मोरे हिवड़ा के पट, बतलाती है गुजरिया लाग न लपट, तज अंगना का वट झट जमना के तट, चली आती है गुजरिया लेवे करवट जब मन का कपट उस पल झटपट नट जाती है गुजरिया ✍️ चिराग़...

गर्व से कहो हम भ्रष्ट हैं

ओलंपिक हो या आस्कर, क्रिकेट हो या हाॅकी और विज्ञान हो या तकनीक; हमारा देश हमेशा ‘नम्बर वन’ बनने से चूक जाता है। पिछले दिनों एक उम्मीद तब बंधी जब एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने विश्व के सबसे भ्रष्ट राष्ट्र का चयन करने का निश्चय किया। भ्रष्टाचार हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। न...
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