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चाहत

दिल ऊँचाई पर जाना भी चाहता है और किसी से बतियाना भी चाहता है दीवाना है, ज़िंदा है जिसकी खातिर उसकी खातिर मर जाना भी चाहता है दिल दे बैठा है जिसके भोलेपन को उस पगली को समझाना भी चाहता है मुश्किल है, अंधियारे को रौशन करना जल जाना तो परवाना भी चाहता है सूरज रब बन जाता है...
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