+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

दिल की ज़मीं

आज उस चेहरे पे मंज़िल की ख़ुशी भी देखी और उन आँखों में कल तक की नमी भी देखी लोग बस जिस्म तक आते थे चले जाते थे इक मगर तूने मेरे दिल की ज़मीं भी देखी ✍️ चिराग़...

प्रभु की वन्दना

नानक, कबीर, महावीर, पीर, गौतम को पंथ-देश-जातियों का नाम मत दीजिए जिनने समाज की तमाम बेड़ियाँ मिटाईं उन्हें किसी बेड़ी का ग़ुलाम मत कीजिए मन के फ़कीर अलमस्त महामानवों को रूढ़ियों से जोड़ बदनाम मत कीजिए प्राणियों के प्रति प्रेम ही प्रभु की वन्दना है भले किसी ईश को प्रणाम मत...

सम्मान नहीं, अपनापन दो!

अभिनन्दन की मालाओं के फूलों की गंध नहीं भाती अनुशंसा और प्रशंसा से मुख पर मुस्कान नहीं आती कोई अभिलाषा शेष नहीं, यश-वैभव-कीर्ति प्रसारण की ये दुनियादारी की बातें मन को न घड़ी भर ललचाती या पूर्ण समर्पित होने दो, या मुझको पूर्ण समर्पण दो सम्मान नहीं, अपनापन दो! झूठे...

कामना

प्रेम, शांति और सौम्यता, सबका हो विस्तार सबके जीवन में भरे, प्यार, प्यार और प्यार ✍️ चिराग़ जैन

दीपोत्सव

दीपोत्सव केवल पर्व नहीं अंधियारे को झुठलाने का ये दिव्य अलौकिक अवसर है, अंतस के दीप जलाने का भीतर के गहन अंधेरे में जब आशा दीप जलायेगी जीवन में उजियारा होगा, दीवाली शुभ हो जाएगी ✍️ चिराग़...

मेरे गीतों की दिव्य प्रेरणा

मेरे अन्तर्मन की पावन-सी कुटिया में मेरे गीतों की दिव्य प्रेरणा बसती है उसकी ऑंखों से बहती हैं ग़ज़लें-नज्में कविता होती है जब वो खुलकर हँसती है हर भाषा, संस्कृति, काल, धर्म और धरती की हर उपमा उस सौंदर्य हेतु बेमानी है सारे नष्वर लौकिक प्रतिमानों से ऊपर सुन्दरता की वो...
error: Content is protected !!