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अतीत से सामना

सामने आ गए आज फिर हम आज फिर से संभलना पड़ेगा एक-दूजे से ख़तरा नहीं है ख़ुद से बच के निकलना पड़ेगा आँख से तुम बरसने न दो बदलियाँ काँपकर सब बयां कर न दें उंगलियाँ चल न आना मेरी ओर सब भूलकर बोलने लग न जाएँ कहीं पुतलियाँ नेह को कब दिखी कोई सीमा देह को ही समझना पड़ेगा...

आँख भर आई

रास्ता दूभर बहुत था हारने का डर बहुत था राह की धरती नहीं थी चाह का अम्बर बहुत था जूझने में व्यस्त थे, सुबकी नहीं आई जीतने पर आँख भर आई ज़िन्दगी की नाव की पतवार का एहसास भी था साथ ही इस अनकहे से प्यार का आभास भी था यूँ समझ लो, द्वार पर शिशुपाल भी था, कंस भी था और मन के...

याद का गीत

याद ने इक रेशमी-सा जाल फिर फैला लिया है मन ज़रूरी काम सारे छोड़कर है गुम याद फिर से आ रही हो तुम त्यौरियां चिन्ताओं का बोझा सम्भाले फिर रही हैं चेतना बरसों पुराने हर्ष में उलझी हुई है हाथ में तो ढेर सारे काम हैं आधे-अधूरे उंगलियाँ केवल तुम्हारे स्पर्श में उलझी हुई हैं...

प्रतीक्षा

कब उगेगा दिन, तुम्हारे आगमन का मैं बहुत दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ कब कोई आकार होगा इस सपन का मैं बहुत दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ मैं युगों से रोज़ लिख-लिखकर संदेशे बादलों के हाथ भेजे जा रहा हूँ शुद्धतम जल से चरण धोऊँ तुम्हारे आँसुओं को भी सहेजे जा रहा हूँ कब मुझे...

प्यार समझना मुश्किल क्यों है

इस दुनिया में प्यार रहे तो भावों का सत्कार रहे तो कितना प्यारा होगा ये संसार समझना मुश्किल क्यों है प्यार समूचे जीवन का है सार; समझना मुश्किल क्यों है किस्सा सुनकर मन सबका कहता है इसमें भूल हुई है बिन मतलब की दुनियादारी पाँखुरियों में शूल हुई है जो रांझे के साथ हुई थी...
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