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अपनों से हारा लालकिला

जब लालकिला बदरंग हुआ हथियार चले हुड़दंग हुआ उस दिन पानी-पानी क्यों था सारा का सारा लालकिला अपनों से हारा लालकिला इस लालकिले ने कितने ही तख़्तों की उलट-पलट देखी साज़िश देखीं, धोखे देखे, इतिहासों की करवट देखी जब भी कोई दुश्मन आया, तब-तब हुंकारा लालकिला अपनों से हारा...

ज़ख़्म कौन धोएगा

भारती आज तेरे ज़ख़्म कौन धोएगा तेरे बँटते हुए आँचल में कौन सोएगा बम्बई ने जो धमाकों के ज़ख़्म खाए हैं भूखे बच्चे जो गोधरा में बिलबिलाए हैं मंदिरों में भी धमाकों की गूंज उठती हैं आज हिन्दोस्तां में अरथियाँ भी लुटती हैं किसी मासूम की जब आह सुनी जाती है तो ख़यालों में यही...
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