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जमुना-कवि संवाद

कल मैंने जमुना से पूछा- “जमुना रानी! क्यों करती हो यूँ मनमानी कहाँ से लाई हो इतना विध्वंसक पानी!” जमुना बोली- “ये पानी? ये पानी न बारिश का है न नदियों-नालों का है ये पानी तो दिल्ली के सरकारी घोटालों का है। ये जो मेरे तटबंधों की चढ़ती हुई जवानी है ये सारा सरकारी आँखों...
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