+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

कोई बिछड़कर मिला है

जहाँ तुमको बस एक पत्थर मिला है वहाँ हमको जन्नत का मंज़र मिला है उसे भी ग़ज़ब का मुक़द्दर मिला है मुक़द्दर में जिसको तिरा दर मिला है कहाँ कोई ऐसा क़लन्दर मिला है जिसे मन मुताबिक़ मुक़द्दर मिला है हुआ एक अरसे के बाद आज तनहा लगा, जैसे कोई बिछड़कर मिला है भले चोट की जिस्म पर...

नज़र

पलक गिरते ही पल में खेल सारे देख लेता हूँ मैं इनसे आँख को ढँक कर सितारे देख लेता हूँ मेरी ये बन्द पलकें दूरबीनों से कहाँ कम हैं मैं इनमें ज़िन्दगी भर के नज़ारे देख लेता हूँ ✍️ चिराग़...

ज़िन्दगी

दुनिया में आ के सकुचाई पल भर फिर ममता की छाँव में सँवर गई ज़िन्दगी पालना, खिलौना, पाठशाला, अनुभव, ज्ञान प्रेम की छुअन से निखर गई ज़िन्दगी क़ामयाबी का गुमान ज़िन्दगी पे लदा और ज़िन्दगी के दाता को अखर गई ज़िन्दगी मौत की हवा ने श्वास का दीया बुझा दिया तो हाड़-हाड़ राख...

वसंत (दो चित्र)

परेशानियों में यदि उलझा हो अंतस् तो कैसा लगता है ये वसंत मत पूछिये एक-एक दिन एक युग लगता है; और कैसे होता है युगों का अंत मत पूछिये प्रेमगीत शोर लगते हैं और लिपियों के चुभते हैं कितने हलन्त मत पूछिये जल विच कमल सरीख़ा लगता है मन काहे बनता है कोई सन्त मत पूछिये धरती के...

प्रभु की वन्दना

नानक, कबीर, महावीर, पीर, गौतम को पंथ-देश-जातियों का नाम मत दीजिए जिनने समाज की तमाम बेड़ियाँ मिटाईं उन्हें किसी बेड़ी का ग़ुलाम मत कीजिए मन के फ़कीर अलमस्त महामानवों को रूढ़ियों से जोड़ बदनाम मत कीजिए प्राणियों के प्रति प्रेम ही प्रभु की वन्दना है भले किसी ईश को प्रणाम मत...
error: Content is protected !!