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सुख का आमंत्रण

पीड़ा की तैयारी कर लो, सुख का आमंत्रण आया है जब-जब कंचन मृग देखा है, तब-तब इक रावण आया है ईश्वर का अवतार जना है, माता को अभियोग मिलेगा कान्हा जैसा लाल मिला है, आगे पुत्रवियोग मिलेगा नारायण के बालसखा ने निर्धनता के कष्ट सहे हैं वंशी के रसिया जीवनभर, समरांगण में व्यस्त...

शब्द शिव हैं

शब्द शिव हैं। जब कभी बहती है भावना उद्विग्न हो मन के भीतर से तो उलझा लेते हैं उसे व्याकरण की जटाओं में। रोक देते हैं उसका सहज प्रवाह। सीमित कर देते हैं उसकी क्षमताएँ। कविता वेग है आवेग है उद्वेग है। वो तो शब्दों ने उलझा लिया वरना, बहा ले जाती सृष्टि के सारे कचरे को।...

प्रेम के रंग से निखारो

जैसा चाहो जवाब दो इसको दुनिया ऐसा सवाल है यारो प्रेम के रंग से निखारो तो ज़िन्दगी बेमिसाल है यारो ✍️ चिराग़...

माखनचोर

कान्हा के किरदार का, कोई ओर न छोर इक पर वो जगदीश है, इक पल माखनचोर गोपी, ग्वाले, बांसुरी, रास, नृत्य, बृजधाम ये सारा कुछ कृष्ण का, केवल इक आयाम ✍️ चिराग़...

राम ने खोया बहुत श्रीराम बनने के लिए

त्याग दी हर कामना निष्काम बनने के लिए तीन पहरों तक तपा दिन, शाम बनने के लिए घर, नगर, परिवार, ममता, प्रेम, अपनापन, दुलार राम ने खोया बहुत श्रीराम बनने के लिए ✍️ चिराग़...
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