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विद्वेष और कविता

कविता मुहब्बत की ज़ुबान है। किसी भी परिस्थिति में घृणा के उद्वेग बोने का काम कविता नहीं कर सकती। कविता बलिदान का शौर्यगायन कर सकती है, किन्तु किसी को ‘किसी भी परिस्थिति में’ बलि लेने के लिए उकसा नहीं सकती। किसी भी वाद या विचार से दूर मनुष्यता को सर्वाेपरि रखना कवि होने...

संजू

आरोप को अपराध मानकर किसी के प्रति राय क़ायम कर लेने की हमारी सामान्य प्रवृत्ति किसी के जीवन को किस हद्द तक चुनौतियों से बेन्ध सकती है -इसी तथ्य की प्रामाणिक कथा है संजू। मीडिया इसी प्रवृत्ति का लाभ उठाकर जनमानस की मानसिक लतों का पोषण करता हुआ अपना गुजर-बसर कर रहा है।...

बुरा मानने वाले लोग

हर आदमी के जीवन में तीन तरह के लोग होते हैं एक जानने वाले एक पहचानने वाले एक बुरा मानने वाले जानने वाले लोग जीवन को बहाव देते हैं पहचानने वाले गाहे-बगाहे भाव देते हैं और बुरा मानने वाले हमेशा तनाव देते हैं। जानने वाले लोग ज़िन्दगी की डोर होते हैं पहचानने वाले बेमतलब का...

दिल्ली

वे भी दिन थे जब पुरानी दिल्ली की तंग गलियाँ अकारण ही मुस्कुरा देती थीं नज़र मिलने पर अजनबियों से भी। दरियागंज की हवेलियाँ अक्सर देखा करती थीं एक कटोरी को देहरी लांघकर इतराते हुए दूसरी देहरी तक जाते कुछ दशक पहले तक। शाहदरा के बेतरबीब मकान चिलचिलाती धूप में अक्सर दरवाज़ा...

मेहमानों का आना-जाना

वो, जिनके घर मेहमानों का आना-जाना होता है उनको घर का हर कमरा, हर रोज़ सजाना होता है जिस देहरी की किस्मत में स्वागत या वंदनवार न हो उस चौखट के भीतर केवल इक तहख़ाना होता है ✍️ चिराग़...
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