+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

महत्व

तुमसे मिलना… …जैसे हाई-वे पर दौड़ती गाड़ी दो पल को ठहरे किसी पैट्रोल पम्प पर। …जैसे परवाज़ की ओर बढ़ता परिंदा यकायक उतर आए धरती पर पानी की चाह में। …जैसे बहुत लंबी मरुथली यात्रा के दौरान हरे पेड़ की छाँव! ✍️ चिराग़...

रिस्क

मेरे भीतर दौड़ना चाहती है इक नदी दरदरे रेगिस्तान की ओर। मस्तिष्क ने कहा- “रिस्क है इसमें।” मन बोला- “जुआ ही तो है या तो लहलहा उठेगा रेगिस्तान या दरदरा जाएगी...

इश्क़

उम्र के इक पड़ाव पर जाकर इश्क़ सबको दुलारता होगा कभी चेहरा निहारता होगा कभी गेसू संवारता होगा ✍️ चिराग़...

माखनचोर

कान्हा के किरदार का, कोई ओर न छोर इक पर वो जगदीश है, इक पल माखनचोर गोपी, ग्वाले, बांसुरी, रास, नृत्य, बृजधाम ये सारा कुछ कृष्ण का, केवल इक आयाम ✍️ चिराग़...

ख़ुशियों को ज़ंजीर

लिखे किसी ने गीत तो समझो, मन को गहरी पीर मिली सृजन हुआ उन्मुक्त तभी जब, ख़ुशियों को ज़ंजीर मिली किस्से बने, कहानी फैली, चित्र सजे, कविता जन्मी पर न मिली मजनू को लैला, ना रांझे को हीर मिली ✍️ चिराग़...
error: Content is protected !!