+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

समाधान

बहुत समझदार हो तुम! जब कभी उदासी का आँचल ओढ़कर जवान होने लगता है मेरा कोई दर्द तो चुपचाप बिना किसी शोर-शराबे के कंधा देकर …पहुँचा आते हो उसे वहाँ …जहाँ से लौट नहीं पाया कोई आज तक! ✍️ चिराग़...

दूसरा प्यार

फिर से मन में अंकुर फूटे, फिर से आँखों में ख़्वाब पले फिर से कुछ अंतस् में पिघला, फिर से श्वासों से स्वर निकले फिर से मैंने सबसे छुपकर, इक मन्नत मांगी ईश्वर से फिर से इक सादा-सा चेहरा, कुछ ख़ास लगा दुनिया भर से फिर इक लड़की की रुचियों से, जीवन के सब प्रतिमान बने फिर इक...

रात से रिश्वत ली है

जीत ने मात से रिश्वत ली है दिल ने जज़्बात से रिश्वत ली है चांदनी कम है अंधेरा ज़्यादा चांद ने रात से रिश्वत ली है फिर से बारिश में चुएगा छप्पर इसने बरसात से रिश्वत ली है सब समय की दुहाई देते हैं सबने हालात से रिश्वत ली है मुझको लगता है मिरी नींदों नें कुछ ख़यालात से...

इक नया रास्ता

ज़िन्दगी जब भी आज़माती है इक नया रास्ता दिखाती है न तो पिंजरे में चहचहाती है न ही अब पंख फड़फड़ाती है जब कभी माँ की याद आती है ये हवा लोरियाँ सुनाती है वो मरासिम को यूँ निभाती है मिरा हर काम भूल जाती है मेरे ख़्वाबों में यूँ वो आती है जैसे पाजेब छनछनाती है लफ़्ज़ मिल पाए तो...

अनदेखी

देर तक देखता रहा मैं एक बिन्दु को आशा भरी नज़रों से लगातार। उतनी ही देर तक तकती रहीं दो आँखें छलछलाती हुईं मुझे भी! ✍️ चिराग़...
error: Content is protected !!