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आस अभी बाक़ी है

हूक सीने के आस-पास अभी बाक़ी है उनके आने की कोई आस अभी बाक़ी है शामो-शब सहरो-सुबह देख चुका हूँ लेकिन और कुछ देखने की प्यास अभी बाक़ी है ✍️ चिराग़...

यादों के ताजमहल में

मैंने मुस्कानें भोगी हैं अब मैं ग़म भी सह लूँगा स्मृतियाँ दिल में उफनीं तो आँसू बनकर बह लूँगा तुम सपनों की बुनियादों पर रँगमहल चिनवा लेना मैं यादों के ताजमहल में शासक बनकर रह लूँगा ✍️ चिराग़...

दिल में आह बाक़ी है

जब तलक़ दिल में आह बाक़ी है तब तलक़ वाह-वाह बाक़ी है अब कहाँ कोई ज़ुल्म ढाता है ये पुरानी कराह बाक़ी है ख्वाब सारे फ़ना हुए लेकिन देखिए ख्वाबगाह बाक़ी है मैंने सब कुछ लुटा दिया लेकिन अब भी इक ख़ैरख्वाह बाक़ी है जिस्म को रूह छोड़ती ही नहीं हो न हो कोई चाह बाक़ी है ज़िन्दगानी भटक गई...

हुनर

तनहा-तनहा था सफ़र क्या कहिए आपका साथ मगर क्या कहिए मुझको मूरत में कर दिया तब्दील तेरे हाथों का हुनर क्या कहिए ✍️ चिराग़...

मिरी आँखों का मंज़र देख लेना

मिरी आँखों का मंज़र देख लेना फिर इक पल को समन्दर देख लेना सफ़र की मुश्क़िलें रोकेंगी लेकिन पलटकर इक दफ़ा घर देख लेना किसी को बेवफ़ा कहने से पहले ज़रा मेरा मुक़द्दर देख लेना बहुत तेज़ी से बदलेगा ज़माना कभी दो पल ठहरकर देख लेना हमेशा को ज़ुदा होने के पल में घड़ी भर ऑंख भरकर देख...
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