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आदमी यकसा मिला

हर कोई ख़ुद को यहाँ कुछ ख़ास बतलाता मिला हर किसी में ढूंढने पर आदमी यकसा मिला आज के इस दौर में आदाब की क़ीमत कहाँ वो क़लंदर हो गया जो सबको ठुकराता मिला हर दफ़ा इक बेक़रारी उनसे मिलने की रही हर दफ़ा ऐसा लगा, इस बार भी बेज़ा मिला जिसने उम्मीदें रखीं और क़ोशिशें हरगिज़ न कीं उसको...

वायरस

जब से डाउनलोड की है तुम्हारे नाम की फाइल बार-बार हैंग होता है दिल का सिस्टम …शायद फाइल में वायरस था जिसने सबसे पहले डी-एक्टिवेट किया ब्रेन का एंटी-वायरस और फिर करप्ट कर दिया ऑपरेटिंग सिस्टम ..स्लो कर दी मेमोरी …शायद इंस्टॉल करनी पड़ेगी नई विंडो ✍️ चिराग़...

तुम्हारा आगमन

ये हवा कल भी बही थी ज़िन्दगी कल भी यही थी कुछ कमी कल भी नहीं थी पर तुम्हारे आगमन ने बीहड़ों में जान भर दी संग अधरों के लगाकर बाँसुरी में तान भर दी बिन तुम्हारे भी अधूरापन नहीं था ज़िन्दगी में पर ख़ुषी का भी कोई कारण नहीं था ज़िन्दगी में ये महक, ये बदलियाँ, ये बारिषंे कल...

सियासत का ज़हर

सच के मंतर से सियासत का ज़हर काट दिया हाँ, ज़रा रास्ता मुश्क़िल था, मगर काट दिया वक्ते-रुख़सत तिरी ऑंखों की तरफ़ देखा था फिर तो बस तेरे तख़य्युल में सफ़र काट दिया फिर से कल रात मिरी मुफ़लिसी के ख़ंज़र ने मिरे बच्चों की तमन्नाओं का पर काट दिया सिर्फ़ शोपीस से कमरे को सजाने के लिए...

कोई गीत नहीं लिखा

तुम रूठी तो मैंने रोकर, कोई गीत नहीं लिखा इस ग़म में दीवाना होकर, कोई गीत नहीं लिखा तुम जब तक थीं साथ तभी तक नज़्में-ग़ज़लें ख़ूब कहीं लेकिन साथ तुम्हारा खोकर कोई गीत नहीं लिखा प्यार भरे लम्हों की इक पल याद नहीं दिल से जाती मन भर-भर आता है फिर भी साँस नहीं रुकने पाती...
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