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मास्टरजी की ऐसी-तैसी

‘मनसुख’ अपने खेत के एक कोने में पक्षियों के लिए चुग्गा डाल रहा था। उसे ऐसा करते देख गाँव के मास्टरजी ने उसे रोकना चाहा। मनसुख ने मास्टरजी को निष्ठुर, निर्दयी और चिड़िया-विरोधी कहकर अपमानित किया और सारे गाँव में कहता फिरा कि ”मास्टर ‘चुग्गा विरोधी गैंग’ का सरगना है।...

ओमिक्रोन की राजनीति

देश एक बार फिर दोराहे पर खड़ा हैं। एक ओर खुला राजमार्ग है जिसके दोनों ओर रोटी-पानी के स्रोत हैं लेकिन उसके हर मोड़ पर ‘दुर्घटना’ होने की आशंका भी है। दूसरी ओर वह बंद सड़क है, जो दुर्घटनाओं से तो हमें सुरक्षित कर देगी लेकिन रोज़मर्रा की ज़रूरतों का अभाव इस सुरक्षा का...

जनकल्याण की भूल-भुलैया

सरकार सदन में चिल्लाती है कि हम जन-कल्याण करेंगे। विपक्ष भी सदन में चिल्लाता है कि हम जन-कल्याण करवाएंगे। दोनों तरफ़ की आवाज़ें ऊँची होती जाती हैं। शोर-शराबा बढ़ता है तो स्पीकर सदन की कार्रवाई स्थगित कर देते हैं। दोनों पक्ष अपनी-अपनी आवाज़ लिए सदन के बाहर निकल आते हैं।...

मध्यम वर्ग का शिकार

मध्यम वर्ग इस देश का सर्वाधिक दीन-हीन प्राणी है। उसका जन्म इसीलिए हुआ है कि वह शासन-प्रशासन से लेकर निजी कंपनियों तक के अर्थ-आखेट के काम आ सके। जंगल में हिरन शिकार के ही काम आते हैं। शेर से बच गये तो लकड़बग्घों, तेंदुओं और सियारों तक की निगाह हिरनों पर रहती है। इन सबसे...

हरिया और आमबाग़

किसी गाँव में आम का एक पुराना बाग़ था। बाग़ में आम के सैंकड़ों पेड़ थे। लेकिन बाग़ पर किसी की कोई मिल्कियत नहीं थी। जब आम की ऋतु आती थी तो इन पेड़ों पर ख़ूब आम लगते। गाँव के शरारती लड़के, आम से लदी डालियों को बेरहमी से नोच डालते। जिसका एक पिता नहीं होता, उसकी सफलता पर उसके...
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