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चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी

चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी कुछ मुंडेरों के मुक़द्दर में चमेली आ गयी पैर भी सुस्ता लिये, आँखों ने भी दम ले लिया ज़िंदगी की राह में, दिल की हवेली आ गई झाँकता है हर कोई ऐसे दिल-ए-नाशाद में जैसे आंगन में कोई दुल्हन नवेली आ गई बोझ कंधों का उतर कर गिर गया जाने कहाँ जब...

ज़िन्दगी

दुनिया में आ के सकुचाई पल भर फिर ममता की छाँव में सँवर गई ज़िन्दगी पालना, खिलौना, पाठशाला, अनुभव, ज्ञान प्रेम की छुअन से निखर गई ज़िन्दगी क़ामयाबी का गुमान ज़िन्दगी पे लदा और ज़िन्दगी के दाता को अखर गई ज़िन्दगी मौत की हवा ने श्वास का दीया बुझा दिया तो हाड़-हाड़ राख...

रोटी

पेट को जब भूख लगती है तो अक्सर पाँव सबके घर से बाहर आ निकलते हैं भूख के कारण सभी प्राणी, परिन्दे, जानवर सब कीट और इन्सान तक संघर्ष करते हैं तितलियाँ लड़ती हैं अक्सर आंधियों से चींटियाँ चलतीं कतारों में निकलकर बांबियों से साँप, बिल को छोड़कर फुफकारते हैं शेर, तजकर मांद...

सच के नाम पे

दुनिया की बदसलूक़ी का तोहफ़ा लिये जिया फिर भी मैं अपने सच का असासा लिये जिया कोई महज ईमान का जज्बा लिये जिया कोई फ़रेब-ओ-झूठ का मलबा लिये जिया टूटन, घुटन, ग़ुबार, अदावत, सफ़ाइयाँ इक शख़्स सच के नाम पे क्या-क्या लिये जिया जब तक मुझे ग़ुनाह का मौक़ा न था नसीब तब तक मैं बेग़ुनाही...

प्रेम से भीगा हृदय

लाख अवगुंठन छिपाएँ प्रीत का मुखड़ा कुछ झलक तो आएगी ही आवरण के पार जब हृदय में नेह के बिरवे नए पल्लव संजोएँ और आकर्षण खिले मन में सुवासित गंध लेकर तब नयन की कोर पर आकर ठहरता है निवेदन श्वास जाती है प्रिये के द्वार तक संबंध लेकर भावनाओं का अनूठा-अनलिखा यह गीत है हर इक...
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