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मुल्क़ में दहशत

जो फैलाने चले हैं मुल्क़ में दहशत धमाकों से वही छुपते फिरा करते हैं इक मुद्दत धमाकों से न ख़बरों में उछाल आया, न बाज़ारों में सूनापन न बिगड़ी मुल्क़ के माहौल की सेहत धमाकों से वही हल्ला, वही चीखें, वही ग़ुस्सा, वही नफ़रत हमें अब हो गई इस शोर की आदत, धमाकों से ये दहशतग़र्द अब...

मर्यादा

न हों हदों में तो छाले रिसाव देते हैं किनारे धार को बाढब बहाव देते हैं हदों में हैं तो ख़ैर-ख्वाह हैं उंगलियों के हदों को लांघ के नाखून घाव देते हैं ✍️ चिराग़...

लोग आते-जाते हैं

दिल भी है इक ख़ूबसूरत से इदारे की तरह लोग आते-जाते हैं, पानी के धारे की तरह जब से ये संसार सारा हो गया है आसमां तब से है इन्सानियत टूटे सितारे की तरह चल सको तो तुम किसी के बन के उसके संग चलो वरना इक दिन छूट जाओगे सहारे की तरह दिल के रिश्तों को फ़रेबी उंगलियों से मत छुओ...

मधुमास

खण्ड-खण्ड कर रहे देश की अखण्डता को, ऐसे दुष्ट लोगों का विनाश होना चाहिए जातिवादियों के जीवन में हलाहल घुले, साम्प्रदायिकों का सर्वनाश होना चाहिए ज्वालाएँ प्रचण्ड मेरे भारत में फिर जलें, एक-एक कोने में प्रकाश होना चाहिए न हो कोई जाति न धरम कोई शेष रहे, पूरे भारत में...

छोड़ो वेद-पुरान

ईश्वर, बालक, माँ, कवि, ये सब एक समान इन्हें प्रेम से जीत लो, छोड़ो वेद-पुरान ✍️ चिराग़ जैन
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