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कामना

प्रेम, शांति और सौम्यता, सबका हो विस्तार सबके जीवन में भरे, प्यार, प्यार और प्यार ✍️ चिराग़ जैन

इक अदद इन्सान

मैंने कब चाहा कि सिर पर ताज होना चाहिए बस मिरे माथे पे माँ का इक दिठोना चाहिए दिल में बेशक़ इक बड़ा अरमां संजोना चाहिए चंद क़तरे ऑंख में पानी भी होना चाहिए घर में ख़ुशियों के लिए कालीन या मखमल नहीं एक छोटा-सा मुहब्बत का बिछोना चाहिए ऑंसुओं की मूक भाषा को समझने के लिए हर...

कोई यूँ ही नहीं चुभता

कोई चीखा है तो उसने बड़ी तड़पन सही होगी कोई यूँ ही नहीं चुभता कहीं टूटन रही होगी किसी को सिर्फ़ पत्थर-दिल समझ कर छोड़ने वालो टटोलो तो सही उस दिल में इक धड़कन रही होगी ✍️ चिराग़...

ग्लोबल वार्मिंग

मेघों का जल घट रहा, सूरज उगले आग धरती धू-धू जल रही, मानव अब तो जाग तप्त धरा, बादल विफल, गया संतुलन डोल रे मानव अब तो संभल, अब तो ऑंखें खोल मानव अब क्यों हो गया, आखिर बिल्कुल मौन तूने ही छलनी करी, दिव्य परत ओज़ोन तितली, धुरवा, बीजुरी, पाला, सावन, कूप धीरे-धीरे धर रहे,...

मीडिया : एक चेहरा ये भी

हमारे मुल्क़ की क़िस्मत में ये विस्फोट क्यूँकर था शहर से गाँव तक माहौल कल दमघोट क्यूँकर था पसीना चू रहा था सबकी पेशानी से पर फिर भी ख़बर पढ़ते हुए उनके बदन पर कोट क्यूँकर था ✍️ चिराग़...
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