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पायल की रुनझुन

हर एक मुहूरत का जग में सत्कार मुझी से सम्भव है बाक़ी सब कुछ सम्भव है पर परिवार मुझी से सम्भव है बर्तन की खनखन चौके में पायल की रुनझुन आंगन में मेरे होंठो पर सजती है गीतों की गुनगुन सावन में जीवन के सोलह सपनों का सिंगार मुझी से सम्भव है बाक़ी सब कुछ सम्भव है पर परिवार...

स्त्री तुम कल आना

स्त्री की सामाजिक स्थिति पर एक प्रभावी कटाक्ष है, अमर कौशिक निर्देशित फिल्म “स्त्री”। नारी मुक्ति के तमाम चलताऊ नारों और मोर्चों से हटकर पुरुषवादी समाज की सोच का शानदार चलचित्र है “स्त्री”। हालांकि फिल्म का प्रचार एक हॉरर-कॉमेडी की तरह किया जा...

लो वेस्ट जीन्स पर बैन

पिछले दिनों इस बात से पूरे समाज में सनसनी फैल गई कि अब लड़के-लड़कियाँ लो वेस्ट जीन्स नहीं पहन सकेंगे। मुद्दआ ये है कि इस प्रकार के परिधानों को उत्तेजक बताते हुए इन पर बैन लगा दिया गया है। अब ये विषय विश्वविद्यालयों की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं से लेकर साहित्यिक पत्रिकाओं...

बिटिया

शादी का जोड़ा चढ़ा, सजे सोलहों साज इक छोटी-सी लाडली, बड़ी हुई है आज विदा समय बाबुल कहे, जोड़े दोनों हाथ मेरी लाज बंधी हुई, बिटिया तेरे साथ बिन कारण ताने सहे, बिन मतलब संत्रास पर उसने तोड़ा नहीं, बाबुल का विश्वास बाबुल तेरी देहरी, जब से छूटी हाय। तब से मन की बात बस, मन ही...

संबंधों की साँस उखड़ने लगती है

जब बेटी की उम्र ज़रा रफ़्तार पकड़ने लगती है तब माँ हर आते-जाते की नज़रें पढ़ने लगती है जब मन की कच्ची मिट्टी कुछ सपने गढ़ने लगती है तब ज़िम्मेदारी की भारी बारिश पड़ने लगती है यूँ तो वो अपनी हर ज़िद्द मनवा ही लेता है मुझसे लेकिन मेरे भीतर-भीतर नफ़रत बढ़ने लगती है प्यार अगर सच्चा...
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