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साहित्य बर्बरीक है

साहित्य करुणा से उपजता है। साहित्य संवेदना से जन्म लेता है। ‘आह से उपजा होगा गान’ -यही ‘आह’ साहित्य की सर्जना का बीज है। यही कारण है कि साहित्य सदैव कमज़ोर की आवाज़ बनता है। साहित्य की समाज में वही भूमिका है, जो महाभारत के युद्ध में बर्बरीक की...

सीता की पाती

मुझको तो वन में रहने का काफ़ी है अभ्यास सुनो! लेकिन तुमने दे डाला है ख़़ुद को कितना त्रास सुनो! तुमने त्याग दिया है मुझको, पर मुझमें बाक़ी हो तुम मैं तुमको संग ले आयी हूँ, कितने एकाकी हो तुम मुझको बस वनवास दिया है, ख़़ुद को कारावास सुनो! मुझको तो वन में रहने का काफ़ी है...

रावण

यदि अब राम की शरण में चला गया; तो मुझे मेरे भीतर का पाप मार डालेगा एकमात्र सधवा बचेगी मेरी पत्नी तो शेष विधवाओं का विलाप मार डालेगा जिनसे सुशोभित थी रावण की राजसभा उन रिक्त आसनों का शाप मार डालेगा मृत्यु जो करेगी वह जग को दिखायी देगा जीवन तो मुझे चुपचाप मार डालेगा जिस...

अयोध्या

शोभ रही नगरी सरयू-तट, खोज रहे उपमा तुलसी नील सरोवर में दमके, जिस भाँति कली इक रातुल-सी मानस-मानस राम बिराजत, आंगन-आंगन माँ तुलसी या नगरी वरनैं न थके, क्या तो आदिकवि, अरु क्या तुलसी ✍️ चिराग़...
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