Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
जिस समय नल और नील समुद्र की लहरों को बांधकर सेतुनिर्माण कर रहे थे, उस समय रावण “भालू-बन्दरों की भीड़” कहकर रामदल का उपहास कर रहा था। यदि नल-नील ने उस उपहास का उत्तर देने में ऊर्जा निवेश की होती तो राम की सेना कभी सागर पार नहीं कर पाती।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
आपके पक्ष में खड़ा कोई सिपाही जब शत्रु के साथ छल करता है, तब वह आपके साथ छल करने का अभ्यास कर रहा होता है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
कट्टरता और परिपक्वता में केवल ‘भी’ और ‘ही’ का अन्तर है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
जिसे नाचना आता है वह अच्छा डांस करता है, लेकिन जिसे नाचना नहीं आता वह मज़ेदार डांस करता है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
सत्य के लिए व्याकरण की नहीं अंतःकरण की आवश्यकता होती है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
समय साक्षी है कि चंद्रगुप्त के बाहुबल को विष्णुगुप्त के निर्देशन ने सम्राट बनाया। कृष्ण के मार्गदर्शन में ही पार्थ सरीखा धनुर्धर युग-विजेता बन सका।
समाज के सम्यक हिताभिलाषी सरस्वती पुत्र सत्ता के सम्मुख सावचेतना की तर्जनी लेकर प्रकट होते हैं, स्तुति के जुड़े हुए हाथ लेकर नहीं!
✍️ चिराग़ जैन