योजना
लोग अड़ी-भिड़ी के चक्कर में इतना समान भर लेते हैं कि भिड़े भिड़े रहते हैं।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
लोग अड़ी-भिड़ी के चक्कर में इतना समान भर लेते हैं कि भिड़े भिड़े रहते हैं।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
यदि कोई साहित्यकार, जनता की रुचियों के लिए अपने समाज के नैतिक स्वास्थ्य को अनदेखा कर रहा है तो समझ लीजिए कि वह औषधालय का बोर्ड लगाकर हलवाई की दुकान चला रहा है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
पारस ही हर बार लोहे को छूकर सोना बना दे, यह ज़रूरी नहीं। कुछ लोहे भी इतने ढीठ होते हैं कि वो जिस पारस को छू दें उसे लोहा बना लेते हैं।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
जिस कुर्सी की एक कील मुझे बहुत चुभती थी; उसी कुर्सी पर किसी और का बैठना
मुझे कील से ज़्यादा चुभता है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
हर राजनेता चाहता है कि मेरा परिवार तो राजनीति में हो लेकिन मेरे परिवार में राजनीति न हो।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
वास्तविकता साकार हो चुकी कल्पना है और कल्पना साकार होने जा रही वास्तविकता है।
✍️ चिराग़ जैन
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