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रचनाकार

जीवन के तमाम प्रश्नचिन्हों के मध्य भी अपने भीतर के कबीर और तुलसी को बचाए रखनेवाले रचनाकार, वर्तमान के ऐसे विस्मयादिबोधक हैं, जिन्हें युग का सम्बोधनकारक बनने के लिए केवल युग के प्रारम्भ की घोषणा करनी है। ✍️ चिराग़...

विचारधारा

विचारधारा वह बोझा है, जो योग्य पात्रों पर लादकर कुम्हार हाथ हिलाते हुए ‘इधर-उधर’ विचरते रहते हैं। ✍️ चिराग़...

कोविड डायरी

अगर नल और नील सेतु-निर्माण में क्रेडिट-गेम खेलते रहे, तो सीता माता की प्रतीक्षा पथरा जाएगी! जब सारी सेना थक जाये तब भी तलवार न छोड़नेवाला योद्धा ही याद रखा जाता है! ✍️ चिराग़...

चोर का साझेदार

चोर को चोरी करते देख भी जो शोर न मचा पाए, या तो वह अपनी चोरी छुपाने में व्यस्त है या फिर चोर का साझेदार है। ✍️ चिराग़...

पहचान

जो लोग पहचान से काम पाना चाहते हैं, उन्हें काम से पहचान नहीं मिलती। ✍️ चिराग़ जैन

वसीयत

वो दौर गये जब लोग वसीयतों में ज़मीन-जायदाद छोड़कर जाते थे, आजकल तो चार सोशल मीडिया अकाउंट्स, कुछ हज़ार फॉलोवर्स और दस-पाँच ब्लॉक्ड प्रोफाइल्स से ज़्यादा किसी के पास कुछ नहीं है छोड़ने को… सफेद बाल और अरथी देखकर वैराग्य घटित होनेवाली कहानियां सुनकर बड़े हुए थे, पर अब...
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