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अर्थ बदल के देख

सूरज जैसा जल के देख सोच में मेरी ढल के देख मुझसे तेज़ निकल के देख अपनी सोच बदल के देख हाला तेरे अंतस् की यहाँ-वहाँ न छलके देख अगुआई क्या होती है मेरे आगे चल के देख फिर से तेरी बात चली फिर से आँसू ढलके देख राम लिखा और तैर गए पत्थर होकर हल्के देख पायल मौन चली आई होंठ...

दिल में कोई कराह

बाक़ी नहीं है दिल में कोई कराह शायद मुद्दत हुई, हुए थे, हम भी तबाह शायद फिर से जहान वाले बदनाम कर रहे हैं फिर से हुई है हम पर उनकी निगाह शायद किस बात पर तू सबसे इतना ख़फ़ा-ख़फ़ा है तुझको कचोटता है तेरा गुनाह शायद फिर रेत पर लहू की बूंदें दिखाई दी हैं कोई ढूंढने चला है सहरा...

आदमी मायूस होता है

हवस की राह चलकर आदमी मायूस होता है सदा आपे से बाहर आदमी मायूस होता है कभी मायूस होकर आदमी खोता है उम्मीदें कभी उम्मीद खोकर आदमी मायूस होता है न हो उम्मीद तो मायूसियाँ छू भी नहीं सकतीं हमेशा आरज़ू कर आदमी मायूस होता है हज़ारों ख्वाब बेशक़ बन्द ऑंखों में पलें लेकिन पलक...

बचपन

हँसी-ख़ुशी के वो लमहे हज़ार बचपन के कभी तो लौटते दिन एक बार बचपन के नहीं, दिमाग़ न थे होशियार बचपन के तभी तो दिन थे बहुत ख़ुशगवार बचपन के बड़े हुए तो बहुत लोग मिल गए लेकिन बिछड़ चुके हैं सभी दोस्त-यार बचपन के जो जिस्म को नहीं दिल को सुक़ून देते थे बहुत अजीब थे वो रोज़गार बचपन...

इक अदद इन्सान

मैंने कब चाहा कि सिर पर ताज होना चाहिए बस मिरे माथे पे माँ का इक दिठोना चाहिए दिल में बेशक़ इक बड़ा अरमां संजोना चाहिए चंद क़तरे ऑंख में पानी भी होना चाहिए घर में ख़ुशियों के लिए कालीन या मखमल नहीं एक छोटा-सा मुहब्बत का बिछोना चाहिए ऑंसुओं की मूक भाषा को समझने के लिए हर...

नमक

यूँ चखा हमने बहुत दुनिया के स्वादों का नमक है ज़माने से अलग माँ की मुरादों का नमक तू परिन्दा है तिरी परवाज़ ना दम तोड़ दे लग गया ग़र शाहज़ादों के लबादों का नमक आँसुओं की शक़्ल ले लेंगी तड़प और सिसकियाँ दिल के छालों पर जो गिर जाएगा यादों का नमक दावतें धोखे की हरगिज़ हो न...
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