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सरस्वती वंदना

जगती को वरदान ये, दीजे माँ वागीश हर इक दीपक को मिले, सूरज से आशीष ✍️ चिराग़ जैन

दशहरा

दुष्टों का संहार कर, संतों पर कर गर्व यही सीख सिखला रहा, हमें दशहरा पर्व ✍️ चिराग़ जैन

प्रार्थना

सब चोरी का माल है, वाणी-भजन-पुराण प्रेम-पत्र लिखवा रहे, ग़ैरों से नादान रटी-रटाई प्रार्थना, सुना-सुनाया ज्ञान बोर किया भगवान को, कैसे हो उत्थान ✍️ चिराग़...

राखी का त्यौहार

महानगर में इस तरह, बदला हर त्यौहार अब तोरण करते नहीं, खड़िया का शृंगार रेडिमेड में ढँक गया, सारा हर्ष-किलोल सोन बनाती बेटियाँ, खड़िया-गेरू घोल ना मोली की सौम्यता, ना रेशम की डोर अब राखी पर दिख रहा, प्लास्टिक चारों ओर कितना डेवलप हो गया, ये पुरख़ों का देस चॉकलेट ने कर...

दीपावली

जीवन बाती से जुड़े, पुरुषार्थों की आग। हर आंगन संदीप्त हो, जाय अंधेरा भाग ॥ दिव्य-दिव्य हों कल्पना, दिव्य-दिव्य हों रंग। दिव्य अल्पनाएँ बनें, हों सब दिव्य प्रसंग ॥ पावन पुष्पों से गुँथें, ऐसे बन्धनवार। जिन्हें लगाकर सज उठें, सबके तोरणद्वार ॥ भोर समीरों में घुलें, गेंदे...

कुछ तो होगी बात

रावण के व्यक्तित्व में, कुछ तो होगी बात जिसे मारने जन्म लें, तीन लोक के नाथ ✍️ चिराग़ जैन
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