सावन
घन, पंछी, बरखा करें, गर्जन, कलरव, सोर
हृदय मयूरा झूमिहै, ज्यों सावन में मोर
जब मेघन का नेह जल, बरसत है चहुँ ओर
इस प्रेमी मन भीगता, उत बिरहन की कोर
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Doha, Poetry
घन, पंछी, बरखा करें, गर्जन, कलरव, सोर
हृदय मयूरा झूमिहै, ज्यों सावन में मोर
जब मेघन का नेह जल, बरसत है चहुँ ओर
इस प्रेमी मन भीगता, उत बिरहन की कोर
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Doha, Poetry
सबके जीवन में भरें पावनता के रंग
ऐसी रंगत लाए अब, होरी अपने संग
अब ऐसे मनने लगा, होली का त्यौहार
चेहरे स्याह-सफेद हैं, रंगे हुए अख़बार
भूले से भी मत करो, पॉवर का मिस-यूज़
भस्म हो गई होलिका, उड़ा पाप का फ्यूज़
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
प्रेम, शांति और सौम्यता, सबका हो विस्तार
सबके जीवन में भरे, प्यार, प्यार और प्यार
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
अपने भीतर झाँक ले, अपना हृदय टटोल
सब कुछ तेरे पास है, अपनी आँखें खोल
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Doha, Poetry
मेघों का जल घट रहा, सूरज उगले आग
धरती धू-धू जल रही, मानव अब तो जाग
तप्त धरा, बादल विफल, गया संतुलन डोल
रे मानव अब तो संभल, अब तो ऑंखें खोल
मानव अब क्यों हो गया, आखिर बिल्कुल मौन
तूने ही छलनी करी, दिव्य परत ओज़ोन
तितली, धुरवा, बीजुरी, पाला, सावन, कूप
धीरे-धीरे धर रहे, इतिहासों का रूप
रिमझिम, झर-झर, झमाझम, बरसा था आकाश
इन बातों पर कल किसे, होएगा विश्वास
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
एक संग आकर कहें, कातिक औ’ रमज़ान
एक जिल्द में बांध दो, गीता और कुरान
✍️ चिराग़ जैन