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छोड़ो वेद-पुरान

ईश्वर, बालक, माँ, कवि, ये सब एक समान इन्हें प्रेम से जीत लो, छोड़ो वेद-पुरान ✍️ चिराग़ जैन

आकांक्षा

तलवे याद न रख सकें, मिट्टी का अहसास इतना ऊँचा मत रखो सपनों का आकाश ✍️ चिराग़ जैन

जीवन को कुछ यूँ जियो

बात यहीं से हो शुरू, और यहीं हो बन्द जीवन को कुछ यूँ जियो, जैसे दोहा छन्द ✍️ चिराग़ जैन
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