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अलविदा 2021

जब ढलेगा आज का सूरज तो उसके साथ ही बुझ जाएगी वो आख़िरी उम्मीद भी जो साल भर पहले लगा बैठे थे तुमसे हम सभी। याद है मुझको करोड़ों कामनाएं गूंज उठी थीं सभी मोबाइलों में; शुभ, मुबारक़ और कितने ही हसीं अल्फ़ाज़ लिखे थे तुम्हारे साथ घड़ी के एक-एक सेकेण्ड की आवाज़ पर उम्मीद का आकार...

मास्टरजी की ऐसी-तैसी

‘मनसुख’ अपने खेत के एक कोने में पक्षियों के लिए चुग्गा डाल रहा था। उसे ऐसा करते देख गाँव के मास्टरजी ने उसे रोकना चाहा। मनसुख ने मास्टरजी को निष्ठुर, निर्दयी और चिड़िया-विरोधी कहकर अपमानित किया और सारे गाँव में कहता फिरा कि ”मास्टर ‘चुग्गा विरोधी गैंग’ का सरगना है।...

चाहत

दिल ऊँचाई पर जाना भी चाहता है और किसी से बतियाना भी चाहता है दीवाना है, ज़िंदा है जिसकी खातिर उसकी खातिर मर जाना भी चाहता है दिल दे बैठा है जिसके भोलेपन को उस पगली को समझाना भी चाहता है मुश्किल है, अंधियारे को रौशन करना जल जाना तो परवाना भी चाहता है सूरज रब बन जाता है...

ओमिक्रोन की राजनीति

देश एक बार फिर दोराहे पर खड़ा हैं। एक ओर खुला राजमार्ग है जिसके दोनों ओर रोटी-पानी के स्रोत हैं लेकिन उसके हर मोड़ पर ‘दुर्घटना’ होने की आशंका भी है। दूसरी ओर वह बंद सड़क है, जो दुर्घटनाओं से तो हमें सुरक्षित कर देगी लेकिन रोज़मर्रा की ज़रूरतों का अभाव इस सुरक्षा का...

शोर

चीखने से शोर बढ़ता है सम्बन्ध नहीं। सुकून की खटिया बुनी जाती है सहजता की बाण से; इसमें प्रयास की गाँठें हों तो मुक्त नहीं हो सकती नींद चुभन से! जताना और बताना व्यापार में होना चाहिए व्यवहार में नहीं। और प्यार में… …वहाँ तो आँखें मिलते ही फिफ्थ गीयर लग जाता...

जनकल्याण की भूल-भुलैया

सरकार सदन में चिल्लाती है कि हम जन-कल्याण करेंगे। विपक्ष भी सदन में चिल्लाता है कि हम जन-कल्याण करवाएंगे। दोनों तरफ़ की आवाज़ें ऊँची होती जाती हैं। शोर-शराबा बढ़ता है तो स्पीकर सदन की कार्रवाई स्थगित कर देते हैं। दोनों पक्ष अपनी-अपनी आवाज़ लिए सदन के बाहर निकल आते हैं।...
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