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विक्रम और बेताल

विक्रम तुम तो वर्तमान हो बल, विवेक, सामर्थ्य सभी कुछ मिला-जुलाकर आगत का सिंगार करो तुम ये क्या अपने कंधे पर तुम भूत लादकर घूम रहे हो क्या तुमको आभास नहीं है जब भी तुम उस प्रेतकाय के उलझे केशों से उलझे हो तब तब तुम अपने भविष्य को पीठ दिखाए खड़े रहे हो और कभी जब उसे...

इधर भी है उधर भी

कुर्सी का घमासान इधर भी है, उधर भी दो लोगों का गुणगान इधर भी है, उधर भी जो डेडिकेट है वो सिर्फ झंडे उठाए दल बदलुओं का मान, इधर भी है उधर भी जो हाँ में हाँ मिलाए, वही पद पे रहेगा सच कहने में नुक़सान इधर भी है, उधर भी किस्मत न बदल पाओ तो क्यों दल बदल रहे सिद्धू तो...

घूमर की धुन पर बीहु

दो दिन प्रकृति की गोद में रहकर अब दिल्ली लौट रहा हूँ। ग्रीष्म ऋतु के जिस प्रकोप में दिल्ली से उड़ान भरी थी, उसके परिप्रेक्ष्य में डिब्रूगढ़ उतरते हुए स्वर्ग की अनुभूति हो रही थी। पायलट ने लैंडिंग की घोषणा की और हमारा विमान घने बादलों के साम्राज्य में प्रविष्ट हो गया।...

शुभचिंतक

एक राजा के दो बेटे थे। एक नाटे कद का था और दूसरा लंबे कद का। बचपन से ही दोनों में तनाव रहता था। जब वे बड़े हुए तो राजा ने राज्य का बंटवारा कर दिया और पूरे देश के अधिकतम नाटे नागरिक नाटे बेटे के देश में चले गए। मूल राज्य में लंबे नागरिक रह गए। लेकिन कुछ नाटे लोग अपना...

बाड़ और अराजकता

कोई मनुष्य अपने भीतर चल रहे प्रत्येक भाव को अभिव्यक्त कर दे, तो समाज उसे तत्काल ‘पागल’ घोषित कर देगा। इच्छाएँ उस मदमस्त गजराज की तरह होती हैं कि उन पर लोकभय का अंकुश न लगाया जाए तो वे पूरा वनप्रदेश तहस-नहस कर सकती हैं। आजकल कुछ लोग अपने मन के भीतर की इन समस्त...

अश्लीलता के मआनी

अधिकारों की ओट में छिपकर उच्छृंखल हो जाना भी उतना ही अश्लील है, जितना संस्कृति की ओट में छिपकर शालीन बनने का ‘दिखावा’ करना। नैतिकता की परिभाषा, काल-पात्र-स्थान के अनुरूप बदल जाती है। शालीनता केवल यौन आचरण तक ही सीमित नहीं है। समय तथा परिस्थिति के अनुरूप आचरण न करते...
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