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असल मुद्दा क्या है

एक अभिनेत्री ने कुछ ऐसे बयान दिये हैं, जो तथ्यात्मक रूप से मिथ्या हो सकते हैं, लेकिन इन बयानों का विरोध करनेवालों की भाषा तथा तर्कशक्ति ने अभिनेत्री के मिथ्या भाषण से ध्यान भंग करने में महती भूमिका अदा की है। ‘कम कपड़े पहनकर फिल्मी पर्दे पर आनेवाली नचनिया हमें बताएगी...

अराजकता को साधुवाद

‘नो एफआईआर, नो इन्वेस्टिगेशन, नो चार्जशीट, फैसला ऑन द स्पॉट…’ -ऐसे संवाद फिल्मों में तो बहुत अच्छे लगते हैं, लेकिन असल ज़िन्दगी में इस डायलॉग पर काम करनेवाले कार्यपालक निरंकुश हो जाते हैं। यह सत्य है कि भारतीय न्याय प्रक्रिया की धीमी गति और लचर व्यवस्था का ही...

वर्तमान गवाह है…

जिन्होंने यह कहना शुरू किया कि इस्लाम ख़तरे में है, उन्हीं के नुमाइंदों ने अफगानिस्तान पर जबरन कब्ज़ा कर लिया। यूएनओ में स्थायी सदस्यता की डींगें हाँकनेवाले देशों के लिए यह शर्मिंदगी भरी लानत है। सबसे उम्दा हथियार बनानेवाले देशों के लिए यह डूब मरने की बात है।...

भगवान के यहाँ मिलावटखोरी

ईश्वर का सिस्टम पूरी तरह त्रुटिरहित होता तो मनुष्यों की देह में वीभत्स पशुओं का जन्म सम्भव नहीं था। किसी के मर जाने पर उसके परिजन जो रुदन करते हैं, उसे देखकर भी जिसकी आत्मा न काँपती हो वह कम से कम मनुष्य तो नहीं हो सकता। एक अदद इन्सान को साँसों के लिए तड़पते देखकर भी...

कोरोना का स्विच सरकार के पास है

न्यूज़ बुलेटिन देखो तो दिमाग़ भन्ना जाता है। एक ख़बर बताती है कि कोरोना के डर के चलते मध्यप्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र में सरकारी नियमों में सख्ती। कोरोना के डर के कारण पंजाब सरकार ने बच्चों की परीक्षाएँ रद्द की। महाराष्ट्र के कुछ शहरों में नाइट कर्फ्यू। दिल्ली में 200...

काश हम समझ सकें!

हर इक मर्यादा के उस पार न हो जाएँ इक रोज़ कहीं हम सब, बीमार न हो जाएँ लाइक्स और कमेंट्स बटोरने की ललक सोशल मीडिया यूज़र्स से जो न करवा दे, वही कम है। इस होड़ में किसी की चरित्र हत्या होती हो, तो होती रहे; किसी की जीवन भर की साधना पर कालिख़ पुतती हो तो पुत जाये; किसी का...
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