संतोष
सिर्फ़ मकरन्द बन के जी लेंगे
हम तेरी गन्ध बन के जी लेंगे
ज़िन्दगी चाक़ हो गई तो क्या
हम भी पैबन्द बन के जी लेंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
सिर्फ़ मकरन्द बन के जी लेंगे
हम तेरी गन्ध बन के जी लेंगे
ज़िन्दगी चाक़ हो गई तो क्या
हम भी पैबन्द बन के जी लेंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Poetry, Unpublished
जगती को वरदान ये, दीजे माँ वागीश
हर इक दीपक को मिले, सूरज से आशीष
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
सभी ग़मों को ग़ज़ल का मुकाम देता है
ख़ुदा सभी को कहाँ ये इनाम देता है
वो जिसकी एक-एक साँस जैसे मिसरा हो
वही जहाँ को मुक़म्मल क़लाम देता है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
सितम का दर्द होता है बहुत गहरा नहीं छिपता
मेरी नज़रों से आँसू का कोई क़तरा नहीं छिपता
किसी के होंठ कितनी भी अदाकारी करें लेकिन
बनावट से हक़ीकत का कभी चेहरा नहीं छिपता
✍️ चिराग़ जैन
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