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मुबारक हो, मुहब्बत मर रही है

सभी की आँख में अंगार बोये जा चुके हैं सभी की बोलियों में ख़ार बोये जा चुके हैं। सभी की मुट्ठियाँ भिंचने लगी हैं लकीरें बेसबब खिंचने लगी हैं सभी के दाँत अब पिसने लगे हैं पुराने ज़ख़्म फिर रिसने लगे हैं ये जलवा भी सियासत कर चुकी है हर इक दिल में शिक़ायत भर चुकी है सुना है...

अलविदा 2021

जब ढलेगा आज का सूरज तो उसके साथ ही बुझ जाएगी वो आख़िरी उम्मीद भी जो साल भर पहले लगा बैठे थे तुमसे हम सभी। याद है मुझको करोड़ों कामनाएं गूंज उठी थीं सभी मोबाइलों में; शुभ, मुबारक़ और कितने ही हसीं अल्फ़ाज़ लिखे थे तुम्हारे साथ घड़ी के एक-एक सेकेण्ड की आवाज़ पर उम्मीद का आकार...

खालीपन

जिस दरपन ने तुम्हें निहारा, उस दरपन का खालीपन और सघन कर देता है इस अंतर्मन का खालीपन कल तक आंगन में उनके आने की कोई आस तो थी अब तो भुतहा सा लगता है इस आंगन का खालीपन सारा कुछ खोकर भी जाने किसे जीतने निकला हूँ शायद मुझमें घर कर बैठा है रावन का खालीपन मेरा सब कुछ लेकर...

रात से रिश्वत ली है

जीत ने मात से रिश्वत ली है दिल ने जज़्बात से रिश्वत ली है चांदनी कम है अंधेरा ज़्यादा चांद ने रात से रिश्वत ली है फिर से बारिश में चुएगा छप्पर इसने बरसात से रिश्वत ली है सब समय की दुहाई देते हैं सबने हालात से रिश्वत ली है मुझको लगता है मिरी नींदों नें कुछ ख़यालात से...

कोई बिछड़कर मिला है

जहाँ तुमको बस एक पत्थर मिला है वहाँ हमको जन्नत का मंज़र मिला है उसे भी ग़ज़ब का मुक़द्दर मिला है मुक़द्दर में जिसको तिरा दर मिला है कहाँ कोई ऐसा क़लन्दर मिला है जिसे मन मुताबिक़ मुक़द्दर मिला है हुआ एक अरसे के बाद आज तनहा लगा, जैसे कोई बिछड़कर मिला है भले चोट की जिस्म पर...
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