+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

ख़ूब रोता हूँ

मैं अब जिन दोगलों के बीच रहकर ख़ूब रोता हूँ मैं उनसे देर तक लम्बी ज़िरहकर ख़ूब रोता हूँ मेरी मासूमियत तो बहुत पहले मर चुकी लेकिन मैं सच बतलाऊँ अब भी झूठ कहकर ख़ूब रोता हूँ ✍️ चिराग़...

गुमान के असर से बचा

चलो किसी तरह मैं मुश्क़िले-सफ़र से बचा ख़ुदा मुझे तू अब गुमान के असर से बचा इन आइनों के सामने से ज़रा बच के निकल तू अपने आप को ख़ुद अपनी भी नज़र से बचा अगर इस आग को बढ़ने से रोकना चाहे तो अपने मुल्क़ को इस आग की ख़बर से बचा ये दुनिया हर किसी पे उंगलियाँ उठाती है तू अपनी सोच को...

हक़ीक़त

सितम का दर्द होता है बहुत गहरा नहीं छिपता मेरी नज़रों से आँसू का कोई क़तरा नहीं छिपता किसी के होंठ कितनी भी अदाकारी करें लेकिन बनावट से हक़ीकत का कभी चेहरा नहीं छिपता ✍️ चिराग़...

जो है वही कहना

किसी भी चोट को सहना बड़ा दुश्वार होता है जु़बां हो और चुप रहना बड़ा दुश्वार होता है ये माना दर्द को अभिव्यक्त करना भी ज़रूरी है मगर जो है वही कहना बड़ा दुश्वार होता है ✍️ चिराग़...
error: Content is protected !!