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मदद की होड़

रेगिस्तान की दोपहर में पानी को तरस रहा एक प्यासा तपती हुई रेत में पड़ा था; ऊपर से सूरज का भी रुख कड़ा था। उसको पानी देने के लिए केंद्र सरकार ने बिल पास किया; राज्य सरकार ने भी उसका स्वतः संज्ञान लिया। लेकिन ज्यों ही राज्य सरकार का कारिंदा मदद लेकर प्यासे की ओर बढ़ा, उसके...

व्यवस्था

इसने कहा कि उसकी वजह से व्यवस्था फेल हो गयी उसने कहा कि इसकी वजह से व्यवस्था फेल हो गयी लेकिन एक बात तो दोनों ने कही- ‘व्यवस्था फेल हो गयी।’ ✍️ चिराग़...

शर्म आनी चाहिए जनता को

कोरोना की वर्तमान स्थिति भयावह है। जनता को चाहिए कि अपनी सुरक्षा के लिए सरकारी नियमों का पालन करे। बाज़ारों में भीड़ देखकर सरकार को घबराहट होती है। जनता होली जैसे अनावश्यक त्योहारों की आड़ लेकर समारोह करने की सोच रही है। लोग, होली मंगल मिलन जैसे बेहूदे कामों के लिये...

शिक़ायत करना मना है

दशकों तक परिश्रम करके तंत्र ने जनता को इतना सहनशील बनाया है कि लाख परेशानियाँ सहकर भी जनता शिक़ायत करने से परहेज करे। हम गाहे-बगाहे सत्ता और राजनीति को कोसते हैं। टेलिविज़न के सामने बैठकर राजनेताओं को भ्रष्ट कह लेते हैं; लेकिन हमारे सामने कुर्सी पर बैठा क्लर्क सामने खड़ी...

किसान आंदोलन

सड़कों पे आया रे किसान, देखे संसद को पलकों पे आँसू के निशान, देखे संसद को अपनी सियासत तुम ही संभालो पैरों में चुभा बस काँटा निकालो रूठ गए हैं जो, उनको मना लो इनसे न बनो अनजान, देखे संसद को अपनों से अपनों की कैसी लड़ाई जनता है छोटी, तुम हो बड़ भाई उनकी अड़ाई, तुम्हारी कड़ाई...
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