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निस्पृह प्रेम

चाहता हूँ उन्हें ये अलग बात है वो मिलें ना मिलें ये अलग बात है एक अहसास से दिल महकने लगा गुल खिलें ना खिलें ये अलग बात है हम मिलें और मिलते रहें हर जनम ज़िन्दगी भर का नाता बने ना बने मन समर्पण के सद्भाव से पूर्ण हों तन भले ही प्रदाता बने ना बने बात दिल की दिलों तक...

चांद का किरदार

एक पल सूरज छिपा और फिर उजाला हो गया लेकिन इसमें चांद का किरदार काला हो गया साज़िशें सूरज निगलने की रची थीं चांद ने पर वो अपनी साज़िशों का ख़ुद निवाला हो गया ✍️ चिराग़...

वो शालीन पल

हाँ, गुज़ारे थे कभी दो-तीन पल कुछ हसीं, कुछ शोख़, कुछ रंगीन पल हर तरह की वासना से हीन पल अब कहाँ मिलते हैं वो शालीन पल भोग, लिप्सा, मोह के संगीन पल कब किसे दे पाए हैं तस्कीन पल आपका आना, ठहरना, लौटना इक मुक़म्मल हादसा थे तीन पल साथ हो तुम तो मुझे लगता है ज्यों हो गए हैं...

सरस्वती वंदना

जगती को वरदान ये, दीजे माँ वागीश हर इक दीपक को मिले, सूरज से आशीष ✍️ चिराग़ जैन

प्रार्थना

सब चोरी का माल है, वाणी-भजन-पुराण प्रेम-पत्र लिखवा रहे, ग़ैरों से नादान रटी-रटाई प्रार्थना, सुना-सुनाया ज्ञान बोर किया भगवान को, कैसे हो उत्थान ✍️ चिराग़...
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