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हमारा लोकतन्त्र महान!

लोकतन्त्र नामक राज्य के आसपास घना ‘लोभारण्य’ था; जिसमें भयानक धनपशु और लाभासुर रहा करते थे। ये लाभासुर जब-तब नागरिकों का रक्त चूसते थे और और धनपशु बर्बरतापूर्वक उनका जीवन नारकीय बना देते थे। ‘नागरिकों’ ने अपनी सुरक्षा के लिए कठिन तपस्या की और व्यवस्था का निर्माण किया।...

विवेक को सोने दो

चेतावनी: यह पोस्ट आपको विवेकशील बना सकती है। और विवेकशील होना आपके राजनैतिक भविष्य के लिए घातक है। हम भयंकर संवेदनहीन लोगों से घिर चुके हैं। ‘अपराधी’; ‘विवश’; ‘दरिन्दा’ और ‘बेचारा’ जैसे उपनाम हमारी राजनैतिक प्रतिबद्धता को देखकर तय किए जाते हैं। भाजपाई होने के लिए...

मध्यम वर्ग की पीड़ा

तुम लड़ते रहे चुनाव, ओ साब मेरी थाली खाली है रही है मुझसे टैक्स वसूला जाए, उन्हें चढ़ावा जाए मैं देकर भी झिड़की खाऊँ, वो खाकर गुर्राए वो मुझे दिखावें ताव, ओ साब मेरी जेब मवाली है रही है मध्यम वर्ग बनाकर मुझको, दोनों ओर निचोड़ा इन्हें दान दो, उन्हें मान दो, नहीं कहीं...

बजट 2024

मैंने सरकार से पूछा जब एक लाख सालाना आय वाले पैसे मांगने आए तो आप क्या कर लेंगे सरकार बोली करना क्या है हम उन्हें जॉब देने वालों को न्यूनतम वेतन कानून उल्लंघन का चार्ज लगाकर धर लेंगे हमने पूछा ये इंटर्नशिप की योजना में तो काफी लोचा है क्या आपने सोचा है लोग नकली...

स्वार्थी कायरता

हम सब बहुत तेज़ी से भीड़ में अकेले होते जा रहे हैं। एक सिंह सैंकड़ों हिरणों के बीच से एक हिरण को उठा लाता है, क्योंकि सिंह आश्वस्त होता है कि आक्रमण के समय झुण्ड का प्रत्येक हिरण एकाकी हो जाएगा। यदि झुण्ड के आठ-दस हिरण भी संगठित होकर सिंह पर धावा बोल दें तो कोई नाहर...
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