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सुरों की आह

ज़माने ने सुरों की आह को झनकार माना है कहीं संवेदना जीती तो उसको हार माना है बड़े बईमान मानी तय किए हैं भावनाओं के जहाँ दो दिल तड़पते हों उसी को प्यार माना है ✍️ चिराग़...

दिल की ज़मीं

आज उस चेहरे पे मंज़िल की ख़ुशी भी देखी और उन आँखों में कल तक की नमी भी देखी लोग बस जिस्म तक आते थे चले जाते थे इक मगर तूने मेरे दिल की ज़मीं भी देखी ✍️ चिराग़...

मेरे गीतों की दिव्य प्रेरणा

मेरे अन्तर्मन की पावन-सी कुटिया में मेरे गीतों की दिव्य प्रेरणा बसती है उसकी ऑंखों से बहती हैं ग़ज़लें-नज्में कविता होती है जब वो खुलकर हँसती है हर भाषा, संस्कृति, काल, धर्म और धरती की हर उपमा उस सौंदर्य हेतु बेमानी है सारे नष्वर लौकिक प्रतिमानों से ऊपर सुन्दरता की वो...

ग़लतफ़हमी

एक लमहे के लिए सारी जवानी काट दी ठीकरों की चाह में इक फ़स्ल धानी काट दी इक न इक दिन कोई तो समझेगा हाले-दिल मिरा इस ग़लतफ़हमी पे सारी ज़िन्दगानी काट दी ✍️ चिराग़...

पनिहारी

पानी भरने को पनिहारी पनघट चली मटकिया मटकती कटि में दबात है गोरी के बदन की छुअन ऐसी मदभरी मदहोश गगरिया झूम-झूम गात है अंग-अंग में सुगन्ध ता पे मतवारी चाल मोरनी भी नत है, हिरनिया भी मात है चूम-चूम पतली कमरिया गुजरिया की गगरिया गोरी संग ठुमका लगात है क्वारी पनिहारी लिए...
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