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कल सँवर जाऊंगा

सिर्फ अपने किसी स्वार्थ को साधने
मैं दिखावा कभी भी न कर पाउँगा
मैं ग़लत को ग़लत ही कहूँगा सदा
झूठ बोला कभी तो बिखर जाउँगा

बस किसी एक झूठी ख़ुशी के लिए
भ्रम तुम्हें सौंप दूँ ज़िन्दगी के लिए
सत्य तो सत्य ही है सभी के लिए
अब बुरा होउंगा कल सँवर जाउंगा

आज कर्तव्य गर ये निभाऊँ नहीं
भ्रम तुम्हारा अगर तोड़ पाऊँ नहीं
और ख़ुद से नज़र मैं मिलाऊँ मैं
कुछ ठिकाना नहीं फिर किधर जाउंगा

यूँ अगर आज रिश्ता निभाना पड़े
हर किसी बात पर सिर झुकाना पड़े
सच समझते हुए मुँह चुराना पड़े
तन जियेगा मगर मन से मर जाऊंगा

आज तुमको अगर पा लिया झूठ से
दोस्ती का दिखावा किया झूठ से
गर तुम्हें आज बहला लिया झूठ से
देखना एक दिन मैं मुकर जाऊंगा

✍️ चिराग़ जैन

हमें ज़िद है

हम अपनापन जताए जा रहे हैं
वो बस रस्में निभाए जा रहे हैं
हमें ज़िद है कि उनको ख़ुश रखेंगे
वो हमको आज़माए जा रहे हैं

✍️ चिराग़ जैन

निभा ले मुझको

मौत ने ज़िन्दगी का मोल लगा रखा है
अपने इक़रार की क़ीमत दे, बचा ले मुझको

मेरे किरदार का हर रंग तो चुभता भी नहीं
एक मौसम ही समझ के तू निभा ले मुझको

✍️ चिराग़ जैन

उम्मीद

कभी तो उम्मीद जी उठेगी
कहीं तो मंज़र हसीं रहेगा
कोई तो ऐसा भी वक़्त होगा
कि जिसको हम पे यकीं रहेगा
कुछेक लम्हों की बात सुनकर
दुआ का दामन न छोड़ देना
किसी चुभन की कसक से चिढ़कर
हसीन गुंचे न तोड़ देना
सुबह के माथे का ये पसीना
सबा को छूकर महक उठेगा
किसी तबस्सुम की बाँह थामे
मलाल यकदम चहक उठेगा
नसीब बदलेगा गर्दिशों का
यहीं हज़ारों कँवल खिलेंगे
इन्हीं उदासी भरे दिनों से
कभी मुहब्बत के पल मिलेंगे
सवाल बदलेंगे ज़िन्दगी के
जवाब अपने यही रहेंगे
हम आज भी सौ टका खरे हैं
हम उस घड़ी भी सही रहेंगे
ज़ेहन में जो भी उठे तमन्ना
उसे कहीं दिल में डाल लेना
नसीब जिस दिन गले लगा ले
हरेक हसरत निकाल लेना

✍️ चिराग़ जैन

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