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उस घड़ी

आप संग गुज़रे लम्हे, पीड़ा अजानी हो गये प्यार के रंगीन पल, क़िस्से-कहानी हो गये हर किसी के ख़्वाब जब से आसमानी हो गये पाप के और पुण्य के तब्दील मआनी हो गये एक दीवाने से झोंके ने उन्हें छू भर लिया और उनकी चूनरी के रंग धानी हो गये सर्द था मौसम तो बहती धार भी जम-सी गयी धूप...

सुरों की आह

ज़माने ने सुरों की आह को झनकार माना है कहीं संवेदना जीती तो उसको हार माना है बड़े बईमान मानी तय किए हैं भावनाओं के जहाँ दो दिल तड़पते हों उसी को प्यार माना है ✍️ चिराग़...

छलना

मटक-मटक लट झटक-झटक; हिया- पट खटपट खटकाती है गुजरिया ठक-ठक-ठक खटकात नटखट मोरे हिवड़ा के पट, बतलाती है गुजरिया लाग न लपट, तज अंगना का वट झट जमना के तट, चली आती है गुजरिया लेवे करवट जब मन का कपट उस पल झटपट नट जाती है गुजरिया ✍️ चिराग़...

दिल की ज़मीं

आज उस चेहरे पे मंज़िल की ख़ुशी भी देखी और उन आँखों में कल तक की नमी भी देखी लोग बस जिस्म तक आते थे चले जाते थे इक मगर तूने मेरे दिल की ज़मीं भी देखी ✍️ चिराग़...

दिल में कोई कराह

बाक़ी नहीं है दिल में कोई कराह शायद मुद्दत हुई, हुए थे, हम भी तबाह शायद फिर से जहान वाले बदनाम कर रहे हैं फिर से हुई है हम पर उनकी निगाह शायद किस बात पर तू सबसे इतना ख़फ़ा-ख़फ़ा है तुझको कचोटता है तेरा गुनाह शायद फिर रेत पर लहू की बूंदें दिखाई दी हैं कोई ढूंढने चला है सहरा...
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