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मुझे अहसास है

किसी पत्थर से जब तूने ये हाले-दिल कहा होगा तेरी आँखों से बरबस दर्द का सागर बहा होगा मेरे दिल ने भी पीड़ा को हज़ारों बार झेला है मुझे अहसास है तूने वो ग़म कैसे सहा होगा ✍️ चिराग़...

इबादत

उनकी बातों में इक इबारत है उनसे मिलना भी इक इबादत है इस ज़मीं के ख़ुदा हैं वो बन्दे जिनके दिल में कहीं मुहब्बत है ✍️ चिराग़...

अनकहा

हम क़लम थामकर सोचते रह गए भाव आँसू बने, आँख से बह गए इक ग़ज़ल काग़ज़ों पर उतर तो गई दर्द दिल के मगर अनकहे रह गए ✍️ चिराग़...
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