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हम तुम पार उतर जाएंगे

सुख होगा, उल्लास रहेगा कभी-कभी कुछ त्रास रहेगा जब सम्बन्ध निभेगा तो फिर उसमें हर एहसास रहेगा अच्छे-बुरे समय से हम-तुम, मिलकर साथ गुज़र जाएंगे अपनेपन की नौका लेकर, इक दिन पार उतर जाएंगे हम दोनों ने इस क़िस्से को मिलकर साथ सँवारा भी है इक किरदार तुम्हारा भी है, इक किरदार...

रिस्क

मेरे भीतर दौड़ना चाहती है इक नदी दरदरे रेगिस्तान की ओर। मस्तिष्क ने कहा- “रिस्क है इसमें।” मन बोला- “जुआ ही तो है या तो लहलहा उठेगा रेगिस्तान या दरदरा जाएगी...

बहाना अनबन का

तू मेरे मन भा जाए या मैं तेरे मन भा जाऊँ तू मुझसे जुड़ता जाए या मैं तुझसे जुड़ता जाऊँ आओ तलाशें कोई बहाना अनबन का, इससे पहले तू मुझसे उकता जाए या मैं तुझसे उकता जाऊँ ✍️ चिराग़...

इक मुक़म्मल बयान

प्यार कब बेज़ुबान होता है लफ्ज़ बिन दास्तान होता है आँख तक बोलने लगें इसमें इक मुक़म्मल बयान होता है ✍️ चिराग़...

लरजिश हमारे लहजे में

कहाँ अचानक मिले हैं हम-तुम, यहाँ के मौसम में शायरी है जवान रुत, मदभरी हवाएँ, ये शाम जैसे ठहर गई है महकती रुत उनके सुर्ख़ नाज़ुक लबों को छूकर बहक रही है सनम के भीगे बदन की लरजिश हमारे लहजे में आ गई है जो सोच की हद में आ गया हो, वो चाहे जो भी हो आदमी है किसी तरह भी समझने...
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