राजवैभव की नहीं है चाह कोई कीर्ति की, यश की नहीं परवाह कोई जय-पराजय की घड़ी में मन सहज हो शोक हो, भय हो, न हो उत्साह कोई राम, मुझको दो भले मत आवरण श्रीराम जैसा दे सको तो, दो मुझे बस आचरण श्रीराम जैसा जग जिसे पाषाण माने, देख लूँ मैं साँस उसकी जो नदी-तट पर खड़ा हो, जान...
नित्य सजाती रही अंगना, प्रभु राम के दर्श की आस में शबरी आस की ऐसी निशंक तपस्या से दर्ज हुई इतिहास में शबरी सीता वियोग से व्याकुल थे, तब घुल गयी राम की प्यास में शबरी राम को भक्ति का स्वाद चखा गयी बेर की जूठी मिठास में शबरी ✍️ चिराग़...
क्यों भला भाती नहीं शीतल नदी की धार यूँ समझ लो आप अपनी प्यास को भूले हुए हो ख़ुश हुए तो भूल बैठे दर्द का उपकार रो पड़े तो प्राण के उल्लास को भूले हुए हो आज से पीछा छुड़ाकर भागते हो एक कोरे ख़्वाब के संग जागते हो क्यों हज़ारों ख़्वाहिशों का ढो रहे हो भार आप शायद वक़्त...
राम… एक ऐसा नाम, जिसका उच्चारण जितने गहरे स्वर में किया जाए, मन उतना ही आराम पाने लगता है। राम… एक ऐसा नाम, जिसको पुकारने के लिए किसी विशेष मनोदशा की आवश्यकता नहीं पड़ती। जो हर परिस्थिति के अनुरूप लय धारण करने में सक्षम है। जिसका उच्चारण यकायक किसी साकार की...