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पुरुषोत्तम: एक मंचन जिसकी पटकथा नहीं लिखी गई

हुई है वही, जो राम रचि राखा मुझे अक्सर ऐसा अनुभव होता है कि मैं एक ऐसी स्क्रिप्ट जी रहा हूँ, जिसमें मेरे लिए एक शानदार पार्ट लिखा गया है। ऐसा लगता है कि जीवन अलग-अलग किस्सों का एक पोथा है, जो अपनी बेहतरीन बुनावट के कारण एक उपन्यास सरीखा जान पड़ता है। आइए, इस पोथी के...

शबरी

नित्य सजाती रही अंगना, प्रभु राम के दर्श की आस में शबरी आस की ऐसी निशंक तपस्या से दर्ज हुई इतिहास में शबरी सीता वियोग से व्याकुल थे, तब घुल गयी राम की प्यास में शबरी राम को भक्ति का स्वाद चखा गयी बेर की जूठी मिठास में शबरी ✍️ चिराग़...

सीता की पाती

मुझको तो वन में रहने का काफ़ी है अभ्यास सुनो! लेकिन तुमने दे डाला है ख़़ुद को कितना त्रास सुनो! तुमने त्याग दिया है मुझको, पर मुझमें बाक़ी हो तुम मैं तुमको संग ले आयी हूँ, कितने एकाकी हो तुम मुझको बस वनवास दिया है, ख़़ुद को कारावास सुनो! मुझको तो वन में रहने का काफ़ी है...
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