+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

भूल

क्यों भला भाती नहीं शीतल नदी की धार यूँ समझ लो आप अपनी प्यास को भूले हुए हो ख़ुश हुए तो भूल बैठे दर्द का उपकार रो पड़े तो प्राण के उल्लास को भूले हुए हो आज से पीछा छुड़ाकर भागते हो एक कोरे ख़्वाब के संग जागते हो क्यों हज़ारों ख़्वाहिशों का ढो रहे हो भार आप शायद वक़्त...

अनाड़ी का आनंद

जिसे नाचना आता है वह अच्छा डांस करता है, लेकिन जिसे नाचना नहीं आता वह मज़ेदार डांस करता है। ✍️ चिराग़...

उजाला हो गया

हर तरफ़ तन्हाइयों का बोलबाला हो गया सर्दियों में रात का मुँह और काला हो गया कर दिया डर के हवाले जब अंधेरे ने मुझे मैंने अपना डर जलाया और उजाला हो गया ✍️ चिराग़...

चिराग़ों के घर नहीं होते

सदा तो सँग तलक दर-ब-दर नहीं होते कहा ये किसने चिराग़ों के घर नहीं होते अभी असर न दिखा हो तो इंतज़ार करो हैं ऐसे दांव भी जो बेअसर नहीं होते ग़मों की धूप में नाज़ुक बदन मुफ़ीद नहीं गुलों के जिस्म नरम, सूखकर नहीं होते खुद अपना बोझ उठाने में कोई हर्ज़ नहीं पराये पाँव बहुत...

कृष्ण का तो चक्र भी ‘सुदर्शन’ है

नंदलला, कन्हैया, कान्हा, गिरिधर, मुरलीधर, गोपाल, मोहन, गोविन्द, मधुसूदन, केशव, रणछोड़, माधव, श्याम, वासुदेव, पीताम्बर… और भी दर्जनों संज्ञाएँ मिलकर थोड़ी-थोड़ी झलक भर दे पाती हैं एक कृष्ण की। और ये सब संज्ञाएँ कृष्ण के नाम भर नहीं हैं, अपितु ये सब नाम कृष्ण के जीवन...
error: Content is protected !!