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हर तरफ़ तन्हाइयों का बोलबाला हो गया
सर्दियों में रात का मुँह और काला हो गया
कर दिया डर के हवाले जब अंधेरे ने मुझे
मैंने अपना डर जलाया और उजाला हो गया

✍️ चिराग़ जैन

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